साइबर सिटी गुरुग्राम की रफ्तार पर शुक्रवार की शाम एक ऐसा ‘पावर ब्रेक’ लगा कि हजारों लोगों की सांसें हलक में अटक गईं. दफ्तरों से थककर घर लौट रहे मुसाफिरों को अंदाजा भी नहीं था कि चमचमाती रैपिड मेट्रो अचानक बीच ट्रैक पर ही हांफ कर खड़ी हो जाएगी. सेक्टर-72 के मुख्य बिजली घर का भारी-भरकम ट्रांसफार्मर क्या फुंका, उसने आधे गुरुग्राम की बत्ती तो गुल की ही. साथ ही रैपिड मेट्रो के पहियों को भी पूरी तरह जाम कर दिया. उमस और घने अंधेरे के बीच जब एक घंटे तक मेट्रो टस से मस नहीं हुई तो यात्रियों का सब्र टूट गया और फिर शुरू हुआ जान जोखिम में डालने वाला वो सफर जिसकी किसी ने कल्पना नहीं की थी. बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग मेट्रो के आपातकालीन दरवाजों से निकलकर लोहे के ट्रैक पर पैदल चलने को मजबूर हो गए. मोबाइल की फ्लैशलाइट के सहारे कंक्रीट और तारों के बीच संतुलन बनाते हुए लोग जब रेंगते-रेंगते स्टेशन तक पहुंचे तो उनकी आंखों में खौफ साफ तैर रहा था. इस हादसे ने मिलेनियम सिटी के वर्ल्ड-क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर के दावों की पोल खोलकर रख दी है..
