लखनऊ. उत्तर प्रदेश ही नहीं देश की राजनीति का केंद्र रही ऐतिहासिक विधानसभा भवन को अब अलविदा कहने का समय आ गया है. 21 फरवरी 1928 को उद्घाटन हुए इस भवन को लगभग 98 वर्ष बाद रिटायर किया जाएगा. इन 98 वर्षों में तमाम सियासी उठापठक का साक्षी रहा यह परिसर अब इतिहास बनने जा रहा है. इसके स्थान पर लखनऊ के गोमतीनगर स्थित सहारा शहर में नया भव्य और अत्याधुनिक विधानसभा परिसर बनाया जाएगा. नई संसद भवन की तर्ज पर तैयार होने वाले इस परियोजना पर 100 करोड़ रुपये से अधिक खर्च होने का अनुमान है.
सहारा शहर में बनेगी यूपी की नई विशानसभा
नया विधानसभा परिसर गोमती नगर के विपुल खंड क्षेत्र में स्थित 245 एकड़ के विशाल प्लॉट पर विकसित किया जाएगा, जिसे पहले सहारा शहर के नाम से जाना जाता था. यह भूमि पहले सहारा इंडिया ग्रुप को लीज पर दी गई थी, जो अब पूरी तरह से सरकार के नियंत्रण में आ चुकी है. लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने इस दिशा में तेजी से काम शुरू कर दिया है. LDA उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. कंसल्टेंट-आर्किटेक्ट चयन के लिए टेंडर जारी कर दिया गया है. 13 मार्च को स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर के साथ तकनीकी सहयोग के लिए MoU साइन किया गया
भूमि कैसे वापस आई?
245 एकड़ भूमि मूल रूप से लखनऊ नगर निगम और LDA की थी. इसे सहारा इंडिया ग्रुप को विकास के लिए लीज पर दिया गया था. लेकिन लीज शर्तों के उल्लंघन और कथित दुरुपयोग के कारण लखनऊ नगर निगम ने पिछले साल 9 अक्टूबर को लीज रद्द कर दी. इसके बाद भूमि फिर से सरकारी कब्जे में आ गई
नया भवन क्यों जरूरी?
वर्तमान विधानसभा भवन लगभग 98 वर्ष पुराना हो चुका है और आधुनिक जरूरतों को पूरा नहीं कर पा रहा है. महिला आरक्षण बिल के तहत अगर भविष्य में परिसीमन होता है तो विधायकों की संख्या बढ़ने की संभावना है. इस लिहाज से एक बड़े परिसर की जरूरत पड़ेगी. इसके अलावा डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और पेपरलेस कार्यप्रणाली की जरूरत भी पड़ेगी. सुरक्षा की दृष्टि से भी एक अत्याधुनिक बड़ा और एकीकृत परिसर की जरूरत है. सरकार को कम से कम 200 एकड़ भूमि की जरूरत थी. सहारा शहर का यह प्लॉट आकार, लोकेशन, कनेक्टिविटी और लखनऊ के महत्वपूर्ण क्षेत्रों से निकटता के कारण पूरी तरह उपयुक्त पाया गया
नये परिसर की क्या होगी खूबी
नया विधानसभा परिसर सिर्फ एक भवन नहीं, बल्कि एक पूर्ण परिसर होगा. इसमें मुख्य विधानसभा भवन, विधान परिषद भवन, मुख्यमंत्री, मंत्रियों और विधायकों के चैंबर, विशाल पार्किंग सुविधा, ग्रीन बेल्ट और पर्यावरण अनुकूल स्थान, सचिवालय कार्यालय सब एक साथ होंगे। ठीक वैसे ही जैसे दिल्ली का सेंट्रल विस्टा है. इस परिसर को ‘ई-विधानसभा’ के रूप में विकसित किया जाएगा. यानी पूरी तरह डिजिटल, पेपरलेस और अत्याधुनिक स्मार्ट टेक्नोलॉजी से लैस. इस प्रोजेक्ट के लिए वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने 11 फरवरी 2026 को पेश 2026-27 के बजट में 100 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं. 4 फरवरी को सरकार ने LDA को साइट चिन्हित करने और डिजाइन तैयार करने का निर्देश दिया.
