
इस साल मई महीना आगे बढ़ने के साथ ही प्रचंड गर्मी का दौर लेकर आ रहा है. मार्च और अप्रैल में मौसम ने अलग-अलग रंग दिखाया लेकिन अब मई के अंतिम समय में झुलसाने वाली गर्मी पड़ रही है. अभी तो नौतपा का दौर भी है. मौसम का मिजाज हर साल नए रिकॉर्ड तोड़ रहा है. जब पारा 45°C या 48°C को छूता है, तो आम बोलचाल में हम कहते हैं कि ‘आज तो जानलेवा गर्मी है.’ लेकिन क्या आप जानते हैं कि वैज्ञानिक और मेडिकल साइंस के नजरिए से इस जानलेवा का असल मतलब क्या है?
हमारा शरीर एक मशीन की तरह है, जिसके काम करने की अपनी एक तय सीमा है. आइए समझते हैं कि इंसानी शरीर कितनी गर्मी बर्दाश्त कर सकता है. अंदर और बाहर के तापमान का क्या खेल है और वो कौन सा पॉइंट है, जिसके बाद शरीर के अंग काम करना बंद कर देते हैं? बदलती जलवायु के इस दौर में गर्मी अब सिर्फ एक ‘मौसम’ नहीं, बल्कि एक ‘स्वास्थ्य आपदा’ बनती जा रही है. प्रकृति की इस चेतावनी को गंभीरता से लेना और अपने शरीर की सीमाओं को समझना ही सबसे बड़ा बचाव है.
